*बाबूजी का उद्बोधन - उद्योगपतियों की बैठक में 🇮🇳*
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*⚖️ NCLT से बदला भारत, लौट रहा बैंकों का पैसा ⚖️*
*पहले क्या था?*
पहले कंपनी दिवालिया घोषित होने के बाद आप उससे पैसा वसूल नहीं कर सकते थे, क्योंकि हिन्दुस्तान में कोई ऐसा कानून ही नहीं था कि कोई दिवालिया हो गया हो तो उससे कर्ज कैसे वसूल किया जाए। अब तक ऐसा ही चलता था।
*2014 में बदला इतिहास*
मोदी सरकार ने बनाया *NCLT यानि National Company Law Tribunal*। इसके बनने के बाद अब जो भी कंपनी दिवालिया होगी उसे NCLT में जाना ही पड़ेगा। वहां बोली लगेगी, कंपनी नीलाम की जाएगी और पैसे वसूल करके बैंकों को दिए जाएँगे, जिससे बैंकों का NPA बढ़ता न रहे।
*केस 1: भूषण पावर एंड स्टील*
मालिक संजय सिंघल की कंपनी 18 महीने पहले दिवालिया घोषित हो गई। इनके ऊपर *PNB बैंक का 47,000 करोड़ रुपया* बकाया था। नीलामी की बोली में टाटा स्टील, जिंदल और UK लिबर्टी हाउस ने बोली लगाई।
*क्लाइमेक्स:* जब नीलामी होने लगी तो भूषण स्टील के मालिक ने NCLT के सामने ऑफर रखा कि _"हम बैंकों का 47,000 करोड़ का कर्ज चुका देंगे, आप हमारी कंपनी नीलाम मत करिये"_।
*केस 2: रुइया ब्रदर्स - एस्सार स्टील*
लगभग यही कहानी है। बैंक कर्ज चुकाने का मन नहीं था, दिवालिए हो गए। NCLT में लक्ष्मी मित्तल ने बोली लगा रखी है। पर अब रुइया ब्रदर्स के पास *54,000 करोड़ आ गया है* और विनती कर रहे हैं कि _"हमारी कंपनी को हम ही खरीद लेते हैं, उसे नीलाम मत करो और 54,000 करोड़ भी हमसे ले लो"_।
*सोचने वाली बात*
जनता को ये सोचना है कि ऐसे कितने उद्योगपतियों ने बैंकों का पैसा खाकर और दिवालिए होकर ऐश काटी है, खासतौर से पिछली एक खास परिवार की सरकारों के समय में। अब उन्हें लोन चुकाना ही होगा।
*ये सब मोदी सरकार के बनाये क़ानून और NCLT जैसी संस्था बनाने से संभव हुआ।* इसीलिए मोदीजी कहते हैं कि _"मैंने कांग्रेस के समय के loop holes यानि गड्ढे भरे हैं"_ तो बिल्कुल अतिश्योक्ति नहीं लगती।
अब तक इन्होंने खुद भी खूब देश के पैसे पर ऐश की और अपने आकाओं यानि खानदानी सरकार यानी कांग्रेस को भी ऐश कराई। कोई समस्या आई तो फिर उन्हें डर काहे का जब उनके _"सैंया भये कोतवाल"_।
*लेकिन अब ये 'चौकीदार' की सरकार है*, और इसके एक आह्वान पर पूरे देश भर में चौकीदारों की लम्बी लाइन खड़ी हो चुकी है। ऐसे देशविरोधी तत्वों को अब डरना ही होगा।
*निर्णय आपको करना है कि अपने देश को लुटेरों को सौंपना है या चौकीदार को सौंपना है।*
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*🖋️ बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल*
_राष्ट्रीय अध्यक्ष_
_डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच_
_नई दिल्ली, भारत_
_उद्योगपतियों की बैठक में उद्बोधन_
*🇮🇳 जय हिन्द 🇮🇳*
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