*सूर्य जब भी पश्चिम में गया है, अस्त ही हुआ है !!*
*हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे...!*
*फिर हम वह अमृत फेंक कर उनमें कीचड़ भरने का काम क्यों कर रहे हैं...?*
■ यदि *मातृनवमी* थी,
तो Mother’s day क्यों लाया गया ?
■ यदि *कौमुदी महोत्सव* था, तो Valentine day क्यों लाया गया ?
■ यदि *गुरुपूर्णिमा* थी,
तो Teacher’s day क्यों लाया गया ?
■ यदि *धन्वन्तरि जयन्ती* थी,
तो Doctor’s day क्यों लाया गया ?
■ यदि *विश्वकर्मा जयंती* थी,
तो Technology day क्यों लाया गया ?
■ यदि *सन्तान सप्तमी* थी,
तो Children’s day क्यों लाया गया ?
■ यदि *नवरात्रि* और *कन्या भोज* था,तो
Daughter’s day क्यों लाया गया ?
■ *रक्षाबंधन* है तो Sister’s day क्यों ?
■ *भाईदूज* है तो Brother’s day क्यों ?
■ *आंवला नवमी, तुलसी विवाह* मनाने वाले हिंदुओं को Environment day की क्या आवश्यकता है ?
■ केवल इतना ही नहीं, *नारद जयन्ती* ब्रह्माण्डीय पत्रकारिता दिवस है...
■ *पितृपक्ष* 7 पीढ़ियों तक के पूर्वजों का पितृपर्व है...
■ *नवरात्रि* को स्त्री के नवरूपों के दिवस के रूप में स्मरण कीजिये...
*सनातन पर्वों को गर्व से मनाईये...*
*पश्चिमी अंधानुकरण मत कीजिये।*
ध्यान रखें .. !!
*"सूर्य जब भी पश्चिम में गया है तब अस्त ही हुआ है।"*
*अपनी संस्कारी जड़ों की ओर लौटिये। अपने सनातन मूल की ओर लौटिये। व्रत, पर्व, त्यौहारों को मनाइये !*
*अपनी संस्कृति और सभ्यता को जीवंत कीजिये। अपील बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच नई दिल्ली*
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