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शायद मैं गलत होऊं #प्रेमानंद जी को जबरदस्त तरीके से सोशल मीडिया पर प्रमोट किया जा रहा है ।

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शायद मैं गलत होऊं #प्रेमानंद जी को जबरदस्त तरीके से सोशल मीडिया पर प्रमोट किया जा रहा है ।

शायद मैं गलत होऊं

#प्रेमानंद जी को जबरदस्त तरीके से सोशल मीडिया पर प्रमोट किया जा रहा है ।

ट्विटर , फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्स एप वगैरह में बड़े ही प्लांटेड तरीके से इनके अहिंसा परमो धर्म वाले प्रवचन बढ़ा चढ़ा कर बार बार रिपीट कर करके दिखाया जा रहा है।

प्रेमानंद जी बगैर किसी संस्कृत वेद पठन की डिग्री के और ना ही किसी बड़े सनातन धर्म के पद पर हैं। सिर्फ कुछ मानवता के उपदेश देते हैं और भक्ति भाव में लीन रहने की बातें करते हैं ।

कारण  
#पंडित_धीरेन्द्र_शास्त्री, #देवकीनंदन_ठाकुर जैसे संतों की आक्रामकता सनातन विरोधियों और  वामपंथियों में घबराहट बढ़ा रही है । इनसे  प्रभावित होकर मुर्दा हिंदू अपने धर्म के प्रति कट्टर होने लगा था और अपने देश के प्रति और अपनी भारत भूमि के प्रति वफादार होने की बातें करने लगा था।

इस बात से "गज़वा ए हिन्द" वालों को अपना ख्वाब अधूरा लगने लगा था।
और प्रेमानंद जी  पाकिस्तान बनाने वाले मोहनदास गांधी के नक्शे-कदम पर चलने वाले अहिंसा परमो धर्म की बातें ज्यादा करते हैं।

प्रेमानन्द जी द्वारा दुबई के अब्दुल को मोटी रकम..

अब्दुल द्वारा प्रेमानन्द जी के आश्रम में नमाज़..

लाखों लोग प्रेमानन्द जी के कक्ष में जाकर दर्शन को तरसते हैं.... दस-दस दिन वृंदावन में पड़े रहते हैं... लेकिन प्रेमानन्द जी के वालंटियर सामान्य हिन्दू श्रद्धालुओं को प्रेमानन्द जी से कक्ष में व्यक्तिगत रूप से मिलने का अवसर नहीं देते...मगर ...
        एक अब्दुल सीधे दुबई से वृंदावन आता है... प्रेमानन्द जी के आश्रम पहुंच जाता है...कहता है कि " रब्बुल-आलमीन अर्थात अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैंने अपना एक शख्स प्रेमानन्द के रूप में ज़मीन पर उतारा है,उससे जाकर मिलो " ...आश्रम पहुचते ही प्रेमानन्द जी के व्यक्तिगत सेवक... अब्दुल का आश्रम में स्वागत करते हैं...शाल पहनाते हैं... कुशल क्षेम पूछते हैं... 
          तभी फज़र की नमाज़ का वक्त हो जाता है,आश्रम में ही अब्दुल हेतु नमाज़ के लिए गुदगुदी चटाई का प्रबंध प्रेमानन्द के व्यक्तिगत सेवक करते है,हज़ारों हिन्दू श्रद्धालुओं के बीच... प्रेमानंद जी के आश्रम में अब्दुल शान से नमाज़ पढ़ता है.... 
        इसके बाद सैकड़ों-हज़ारों हिन्दू श्रद्धालुओं को छोड़ अब्दुल को प्रेमानन्द जी अपने कक्ष में बुलाते हैं ! जब अब्दुल प्रेमानन्द जी के कक्ष में पहुंचता है तो पुनः प्रेमानन्द जी अब्दुल को शाल/अंगवस्त्र (दूसरी बार) पहनाते हैं,अपने पास बैठाते हैं,कहते हैं सनातन धर्म और इस्लाम मे कोई अंतर नहीं है.. सभी 'धर्म' शांति और समानता पर आधारित है...
अब्दुल इस्लाम की अच्छाइयों के बारे में प्रेमानन्द जी बताता है,जिससे प्रेमानन्द पूर्णतया सहमत हो जाते है...अब्दुल के प्रति प्रेमानन्द जी का प्रेम इतना उमड़ता है कि प्रेमानन्द जी आंखों से प्रेमधारा बहने लगती है...
         अंत मे जब अब्दुल विदा होता है तो प्रेमानन्द एक मोटी रकम ...अब्दुल के हाथों में रख देते हैं...l

यह हिंदुओं का पैसा है मुल्लों को दिया गया 
यह मुल्ला उसी पैसे का प्रयोग जेहाद में करेंगे 
किसी लव जेहादी के लिए बाइक खरीदी जाएगी और किसी कन्हैया का गला काटने हेतु छुरा

इसीलिए जगतगुरु रामभद्राचार्य जी ने प्रेमानंद के बारे में सावधान किया था। यह जानकारी आज बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच नई दिल्ली भारत ने अपने उद्बोधन में कही। www.dspmrvm.com email ID dspmrvm@gmail.com

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